आज जो ममता कर रही हैं लालू 20 साल पहले कर चुके हैं, तब सीबीआई को मांगनी पड़ी थी सेना से मदद

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कोलकाता में कल देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को ये बात समझ आ गई कि राज्य सरकार की मशीनरी के सामने वो कुछ नहीं है। शारदा चिट फंड घोटाले मामले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने गई सीबीआई को ही कोलकाता पुलिस ने बंधक बना लिया। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार के खिलाफ और अपने कमिश्नर के बचाव में धरने पर बैठ गई।

नई पीढ़ी को लगता है कि ऐसा देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ ऐसा ही घटनाक्रम बिहार में हो चूका है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सीबीआई पुलिस कमिश्नर के लिए आई थी और राज्य की मुख्यमंत्री सीबीआई के खिलाफ धरने पर बैठी है जबकि तब सीबीआई राज्य के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने आई थी और सरकारी मशीनरी ने सीबीआई के पसीने छुड़ा दिए थे। हालात यहाँ तक आ पहुंची थी कि सीबीआई को सेना से मदद मांगनी पड़ी थी।

बात है 1997 की, लालू यादव तब बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। लालू यादव का नाम चारा घोटाले में आया था। तब यू। एन. बिस्वास सीबीआई के ज्वाइंट डिरेक्टर हुआ करते थे और चारा घोटाले की जांच कर रहे थे। कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया और सीबीआई उन्हें गिरफ्तार करने पटना आने वाली थी। लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। अब बिहार में मुख्यमंत्री बदल चूका थ अलेकिन सत्ता पर नियंत्रण लालू यादव का ही था। सरकारी मशीनरी उनके पास थी। लालू यादव ने सीबीआई के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया। तब बिहार में मौजूद सीबीआई अधिकारियों को अपनी जान पर भी खतरा नज़र आने लगा। फिर कुछ ऐसा हुआ जो शायद देश में कभी नहीं हुआ था। बिस्वास ने पटना स्थित सीबीआई दफ्तर में मौजूद एसपी से कहा कि वो लालू यादव को गिरफ्तार करने और वारंट पर अमल करने के लिए सेना की मदद लें।

सीबीआई ने बिहार के चीफ सेक्रेटरी बी.पी. वर्मा से संपर्क किया ताकि लालू यादव को गिरफ्तार करने में मदद ली जा सके लेकिन सीबीआई को बताया गया कि चीफ सेक्रेटरी अभी उपलब्ध नहीं हैं। सीबीआई अ‍फसरों ने इसके बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से संपर्क किया। डीजीपी ने कहा, ‘उन्हें कुछ और समय चाहिए’ तब बिस्वास से सेना की मदद लेने का सुझाव दिया। तब सीबीआई एसपी ने दानापुर कैंट के इंचार्ज अफसर को लेटर लिखा और कहा कि तत्काल उन्हें एक i उपलब्ध कराई जाए लेकिन सेना ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उन्हें सेना मुख्यालय के आदेश का इंतज़ार करना होगा। क्योंकि सेना सिर्फ अधिकृत सिविल अथॉरिटीज के अनुरोध पर ही नागरिक प्रशासन में किसी तरह की मदद करता है। हर तरफ से निराश हो चुके सीबीआई ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने बिहार के को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

लालू को गिरफ्तार करके यू. एन. विश्वास देश में सुर्ख़ियों में आ गए। लेकिन अभी कहानी बाकी है। संवैधानिक व्यवस्था को बरक़रार रखने के बाद में यू.एन बिस्वास ने राजनीति में कदम रखा और अपने लिए पार्टी चुनी तृणमूल कांग्रेस। ममता सरकार में वो पिछड़ा कल्याण मंत्री बनाए गए। और आज ममता बनर्जी सीबीआई के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुकी हैं।

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