NEET मेरिट-आधारित प्रवेश सुनिश्चित करने में विफल क्यों है, जानिए

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NEET 2019, Entrance exam, Success, सीटें , रैंक , लाख , प्रवेश , NEET मेरिट

NEET 2019 के जरिए करीब 61 हजार सीटें भरी जानी थी, क्योंकि NEET के पहले के वर्षों में, प्रवेश पाने वालों की रैंक सभी तरह से 8.45 लाख हो गई थी। इसलिए सवाल उठता है कि अगर अच्छे मार्क्स या अंक पाने वाले लाखों छात्रों का एडमिशन नहीं हुआ, तो जो छात्र लिस्ट में निचले पायदान पर थे, क्या उनका एडमिशन मैरिड या योग्यता के आधार पर हो सकता है?

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केवल सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगिरी) में नहीं बल्कि हर श्रेणी में एब्सिल्म रैंक वाले छात्रों को स्पष्ट रूप से प्रवेश करने वाली सीटों पर एडमिशन मिला है, जो कि हर श्रेणी में एक प्रकार से व्यवस्थित रूप बनाई गई मैरिड पर आधारित था। इसमें हर कैटेगिरी के छात्र को अच्छे अंक मिले।

श्रेणीआवश्यक उम्मीदवारों की संख्या*NEET रैंक जिस पर यह मिला हैNEET परसेंटाइल जिस पर यह मिला हैवास्तविक प्रतिशत कटौती
Open1,18,0001.18 lac91.650
OBC37,26087,00093.840
SC17,9402.2 lac84.340
ST9,6603.5 lac75.140

*सभी सरकारी सीटों और निजी कॉलेज की आधी सीटों पर कोटा मान कर

ये कैसे संभव है? कई निजी कॉलेजों में, जहां बहुत कम अंक पाने वाले छात्रों को भी एडमिशन या प्रवेश मिला है। बता दें कि इन कॉलेजों में हर एक सीट का वार्षिक शुल्क 17 लाख से लेकर 23 लाख रुपये तक है और इन्ही सीट पर एनआरआई (NRI) को सालाना 33 लाख रुपये तक फीस के रूप में जमा करने होते हैं। इतना ही नहीं MBBS कोर्स के लिए कई कॉलेज में फीस का ये आंकड़ा एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जिसमें हॉस्टल फीस, एग्जाम फीस और बाकी अन्य खर्चे जुड़े होते हैं। हालांकि इस दौरान अच्छे नंबर लाने वाले बहुत से छात्र इन कॉलेजों की पहुंच से बहुत दूर होते हैं।

सरकारी कॉलेज की सभी सीट और कुछ निजी कॉलेज की सीटों पर आरक्षण लागू होता है। जिसके तहत ओबीसी श्रेणी के लिए 12,500 (27%) सीट, एससी के लिए 6 हजार यानी 12.5% और 3,200 यानी 7% सीटें एसटी श्रेणी के लिए आरक्षित हैं, जबकि सामान्य श्रेणी में सीटों की संख्या 40 हजार हैं। विशेषज्ञों को लगता है कि सीट और पास होने वाले छात्रों की संख्या के बीच 1: 3 का अनुपात है, जो सभी सीटों को भरने के लिए काफी है। क्योंकि, 3 क्वालिफाइड उम्मीदवारों पर अलग-अलग श्रेणी में एक सीट है। जो कि ओबीसी में लगभग 37,300, एससी में 18,000 और एसटी में 10,000 है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने NEET श्रेणी रैंक पर डेटा एक्सेस किया और इस दौरान पाया कि NEET में शीर्ष 87,000 रैंक वाले उम्मीदवारों में 38,000 से अधिक ओबीसी उम्मीदवार शामिल थे। जिसका मतलब हुआ कि 93.8 प्रतिशत का कटऑफ ओबीसी की सीटें भरने के लिए काफी है। वहीं एससी वर्ग के लिए, NEET रैंक 2.2 लाख या 84.3 प्रतिशत का कटऑफ में आवश्यक होगा।

एसटी के लिए, NEET रैंक 3.5 लाख, 75.1 प्रतिशत के बराबर 10,000 योग्य छात्रों के लिए पर्याप्त होगा। वहीं सामान्य श्रेणी में, 1:3 अनुपात के लिए लगभग 1.2 लाख छात्र होने चाहिए। इसका मतलब हुआ कि 91.6 प्रतिशत के बराबर 1.18 लाख एनईईटी रैंक में कटौती।

हालांकि, वास्तविक रूप से कट-ऑफ रैंक सामान्य वर्ग के लिए लगभग 7 लाख या 50 प्रतिशत था, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी के लिए यह 8.45 लाख या 40 प्रतिशत था। इस प्रकार, प्रत्येक कोटे के भीतर भी, अधिक स्कोर वाले गरीब छात्रों को अमीर छात्रों द्वारा अपनी सीटों से बेदखल किया जा रहा है।

खैर यह संभव है, क्योंकि शत-प्रतिशत कट ऑफ अस्वाभाविक रूप से कम होने के कारण 1:13, या 13 योग्य छात्रों को प्रत्येक सीट के लिए उपलब्ध होने की अनुमति देता है, कॉलेजों को ‘योग्य’ एनईईटी उम्मीदवारों की सूची में नीचे आने में मदद मिलती है जब तक कि उन्हें वो लोग या छात्र नहीं मिल जाते, जो इतनी बड़ी फीस या खर्चे को अफोर्ड कर सकते हों।