27 साल के शांतनु को रतन टाटा ने फोन किया और पूछा- मेरे असिस् असिस्‍टेंट बनोगे?

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देश के मशहूर उद्योगपति और फिलेनथ्रोपिस्‍ट रतन टाटा के साथ काम करना अपने आप में एक उपलब्‍ध‍ि है। खासकर तब जब आपसे वह करने को कहा जाए जो आपका सपना हो। इतना ही नहीं, एक ऐसा काम जिसके लिए खुद रतन टाटा आपको फोन करें और जॉब ऑफर करें। 27 साल के शांतनु नायडू के यह सब किसी सपने से कम नहीं है। फेसबुक पर ‘ह्यूमन्‍स ऑफ बॉम्‍बे’ से शांतनु ने अपनी सफलता की कहानी साझा की है, जो खूब वायरल हो रही है।

5 साल पहले हुई थी मुलाकात

बुधवार को फेसबुक पर शांतनु की कहानी शेयर की गई, जिसे खबर लिखे जाने तक 19 घंटों में 20 हजार से ज्‍यादा लोगों ने पसंद किया है। इसे 1.7k से अध‍िक यूजर्स ने शेयर किया है। अपनी कहानी सुनाते हुए शांतनु बताते हैं कि रतन टाटा से उनकी पहली मुलाकात 5 साल पहले 2014 में हुई थी।

आवारा कुत्तों की जान बचाने का जिम्‍मा

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, November 20, 2019

वह बताते हैं कि पांच साल पहले सड़क पर आवारा कुत्तों की लगातार मौत ने उन्‍हें बहुत दुखी किया। इस बाबत कुछ करने की जिद ठानकर बैठे शांतनु को एक आइडिया आया। उन्‍होंने कुत्तों के गलों में रिफ्लेक्‍टर लगे हुए कॉलर्स लगाने शुरू किए। ऐसा इसलिए कि इस तरह तेज गति से आ रहे ड्राइवर्स को दूर से ही सड़क पर कुत्तों के होने की जानकारी मिल जाएगी। शांतनु के इस काम की तारीफ हुई और टाटा ग्रुप ऑफ कंपनीज के ‘न्‍यूजलेटर’ में भी उनकी स्‍टोरी छपी।

दो महीने बाद आया चिट्ठी का जवाब

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, November 20, 2019

 

शांतनु कहते हैं, ‘उसी समय मेरे पिता ने मुझे कहा कि मैं रतन टाटा को एक चिट्ठी लिखूं, क्‍योंकि उन्‍हें भी कुत्तों से बहुत प्‍यार है। हालांकि, शुरुआत में मुझे थोड़ी झ‍िझक हुई। लेकिन फिर मैंने चिट्ठी लिखी। दो महीने बाद मुझे चिट्ठी का जवाब मिला। खुद रतन टाटा ने मुझे मिलने बुलाया था। मेरे लिए इस पर यकीन करना मुश्‍क‍िल हो रहा था।’ कुछ दिनों बाद शांतनु रतन टाटा से उनके मुंबई दफ्तर में मिले और यह मुलाकात उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।

मास्‍टर्स की डिग्री लेने विदेश गए शांतनु

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, November 20, 2019

 

शांतनु आगे बताते हैं कि रतन टाटा ने उनके काम की तारीफ की। टाटा ने कहा कि वह शांतनु के काम से बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्‍होंने शांतनु के फ्यूचर वेंचर में निवेश करने की भी बात की। शांतनु रतन टाटा के कुत्तों से भी मिले। इस मुलाकात के बाद शांतनु अपने मास्‍टर्स की डिग्री पूरी करने के लिए विदेश चले गए। लेकिन उन्‍होंने रतन टाटा से वादा किया कि वह लौटकर टाटा ट्रस्‍ट के लिए ही काम करेंगे।

…और उस दिन रतन टाटा ने फोन किया

“I graduated in 2014 and started working at Tata group. Life was going pretty smooth, until one evening, while on my way…

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, November 20, 2019

 

शांतनु कहते हैं, ‘मैं जैसे ही भारत लौटा, मुझे उनका फोन आया। उन्‍होंने मुझसे कहा- मुझे ऑफिस में बहुत सारा काम करवाना है। क्‍या तुम मेरे असिस्‍टेंट बनोगे?’ शांतनु के लिए यह किसी सपने जैसा था। उन्‍हें एकबारगी तो यकीन नहीं हुआ, लेकिन फिर उन्‍होंने गहरी सांस ली और कहा- हां, जरूर।

18 महीने से एक टीम बनाकर कर रहे हैं काम

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, November 20, 2019

शांतनु बीते 18 महीने से रतन टाटा के साथ उनके ट्रस्‍ट के लिए काम कर रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मुझे अभी भी कई बार यकीन नहीं होता कि मैं अपने सपने को जी रहा हूं। मेरी उम्र के लोग अच्‍छे दोस्‍त और गुरु की तलाश में कितना कुछ नहीं झेलते। मैं खुशनसीब हूं मुझे यह सब मिला है। रतन टाटा किसी सुपरह्यूमन से कम नहीं हैं।’

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